पत्रकार अमरेंद्र के किरदार ने बॉक्सऑफिस में दिखाया कमाल

लखनऊ (Dr. Mohd Kamran )।बाहुबली फ़िल्म में अमरेंद्र के किरदार ने बॉक्सऑफिस पर जो कमाल दिखाया वही उत्तर प्रदेश की मौनावस्था में चल रही पत्रकारिता में पत्रकार अमरेंद्र ने कर दिखाया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र की कवरेज हेतु पत्रकारो को प्रवेश पत्र में चल रही अनेक अनियमितताओं पर अमरेंद्र ने आवाज़ उठाने की हिम्मत दिखाई और अपनी कलम से इस पूरे तंत्र के खिलाफ उस वक़्त कलम चलाई जब सरकार के उच्च पद पर बैठे अधिकारियों ने मीडिया द्वारा प्रवेश पत्र की अनियमितताओं के ख़िलाफ़ लिखने या बोलने पर पाबंदी लगा दी हो, व्हाट्सएप्प ग्रुप पर एक वरिष्ठ पत्रकार के माध्यम से चेतावनी देता हुआ संदेश प्रचारित एवं प्रसारित किया गया जिसको देखकर कोई भी कलमकार अपनी कलम न चला सके और न ही आवाज़ बुलंद करें “*चेतावनी*

*विधानसभा के सत्र कवरेज के लिये विधानसभा के खिलाफ जो साथी ग्रुप में लिख रहे हैं, उन सभी लोगों और ग्रुप एडमिनों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने जा रहा है।* विधानसभा की तरफ से मुझसे कहा गया है कि जिन लोगों को अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल जी कवरेज के पास के लिये लिखेंगे, उनका विधान सभा में सीट की उपलब्धता के आधार पर पास निर्गत किया जायेगा।”

इस संदेश को प्रचारित, प्रसारित करने का सिर्फ एक ही मक़सद हो सकता है कि कोई भी कलमकार प्रवेश पत्र में चल रही अनियमितताओं पर किसी को आईना दिखाने की कोशिश न करें लेकिन विषम परिस्थितियों में भी पत्रकार अमरेंद्र ने बहादुरी के साथ अपनी कलम से इस पूरी व्यवस्था पर न सिर्फ उँगली उठायी बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की विधानसभा प्रवेश पत्र की नीतियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अपने इसी सनसनीखेज़ खुलासे से अमरेंद्र ने बाहुबली की तरह उत्तर प्रदेश के मीडिया जगत के बॉक्सऑफिस में कमाल और धमाल मचा दिया है। सही मायनों में देखा जाए तो विधानसभा की कवरेज हेतु जिन पत्रकारो की सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है वो बनाये गए मानकों से एकदम विपरीत है जिसकी उच्च स्तरीय जांच कराए जाने पर सारा सच सामने आ जायेगा और मुकदमा दर्ज कराए जाने की आवश्यकता ज़रूर होगी लेकिन उनपर जिनका प्रवेश पत्र बिना किसी मानकों एवं बिना किसी मान्यता के मीडिया घराने के नाम पर बनाया गया होगा।

मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के प्रवेश पत्र भी विचित्र मापदंडों के चलते नही बने लेकिन अनेक ऐसे प्रवेश पत्र जारी हुए जो किसी भी मापदंड एवं नियमों के अनुरूप नही हो सकते। आख़िर क्या वजह है कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का असर विधानसभा की कार्यवाही की कवरेज हेतु जारी प्रवेश पत्रों पर नही दिख रहा है। अमरेंद्र ने बहादुरी का साथ लेकर इस मुहिम की अलख जगाई है वहीं अन्य पत्रकार संगठन और कलमकारों की खामोशी एक बड़ा सवाल भी है ?

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