भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी को मिला है रिटर्न गिफ्ट !

आईना तो बस यूं ही बदनाम है, असलियत उनकी दिखाता है जो अपना रिटर्न गिफ्ट तक भूल जाते हैं।

अजय वर्मा, राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार

उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद से भारतीय जनता पार्टी के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी द्वारा बलवाइयों को “रिटर्न गिफ्ट” नाम से वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है जिसमें पुलिसकर्मी हिरासत में लिए गए लोगों को बुरी तरीके से पीट रहे हैं। इस तरीके के वीडियो को रिटर्न गिफ्ट बता कर समाज को भाजपा विधायक कौन सा आईना दिखाने की कोशिश कर रहे हैं यह बात तो समझ से परे है लेकिन पुलिसिया रिटर्न गिफ्ट के दर्द के एहसास से भली भांति परिचित है भाजपा विधायक। शलभ मणि त्रिपाठी द्वारा वायरल किया गया वीडियो सहारनपुर में 10 जून को हुई हिंसा में संदेह के आधार पर गिरफ़्तार किये गए नौजवानों को पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटे जाने का है जिसे विधायक जी द्वारा रिटर्न गिफ्ट का नाम दिया गया है।

भाजपा विधायक द्वारा पुलिसिया उत्पीड़न के वीडियो को रिटर्न गिफ्ट का नाम देकर लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह वायरल कर रहे हैं उस रिटर्न गिफ्ट के दर्द और एहसास से भलीभांति परिचित हैं। 11 साल पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने पत्रकारिता के कार्यकाल में शलभ मणि त्रिपाठी को पुलिस अधिकारियों द्वारा अपशब्द कह कर मारापीटी की गई थी।उनके सहयोगी मनोज राजन त्रिपाठी के साथ भी मारपीट की, जिन्होंने उन्हें बचाने की कोशिश की और फिर जबरन पुलिस जिप्सी में बिठाया और हजरतगंज थाने ले गए। थाने ले जाते समय पुलिसकर्मी उसे गालियां देते रहे और जान से मारने की धमकी देते रहे।

इस रिटर्न गिफ्ट के दर्द और एहसास से भली भांति परिचित हैं, उन को आईना दिखाने की जरूरत नहीं है। मौजूदा वक्त के लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर उस वक्त पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर आसीन थे और शलभ मणि त्रिपाठी एक हिंदी समाचार चैनल में कार्यरत है। पुलिस को दी गई तहरीर के आईने में स्पष्ट है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पूर्वी बीपी अशोक और तत्कालीन हजरतगंज क्षेत्र के सीओ अनूप कुमार ने न सिर्फ गालियों भरा रिटर्न गिफ्ट दिया था बल्कि पुलिस की लाठी के शानदार तोहफे से स्वागत किया था। पत्रकारों की एकता के चलते पुलिस पर ऐसा दबाव बना कि डीके ठाकुर द्वारा पुलिस अधिकारियों को न सिर्फ निलंबित किया गया बल्कि आईपीसी की अनेक संगीन धाराओं में पुलिस पर मुकदमा भी दर्ज किया गया।

यहां यह बताने की जरूरत नहीं है कि मुकदमे का अंजाम क्या हुआ होगा क्योंकि रिटर्न गिफ्ट तो हर जगह चलता है, मुकदमे से पहले या मुकदमे को समझौते का नाम देकर खत्म करने पर भी रिटर्न गिफ्ट लिया जाता है। सहारनपुर की घटना न सिर्फ पुलिसिया उत्पीड़न है बल्कि शलभ मणि त्रिपाठी द्वारा पुलिस यातना और पुलिस डंडे का शिकार होने के बाद जिस तरह आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 342 (गलत तरीके से कारावास), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है वैसे ही सहारनपुर की घटना पर पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिये।

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