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कोरोना काल में PPF, NSC जैसी स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर बढ़ा निवेशकों का भरोसा, सरकार को कर्ज घटाने में मिलती है मदद

कोरोना काल में लोगों का पब्लिक प्रोविडेंट फंड, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट जैसी स्मॉल सेविंग स्कीम्स के प्रति क्रेज बढ़ा है. बजट डेटा के मुताबिक, निवेशकों ने बेहतर रिटर्न मिलने के कारण चालू वित्त वर्ष में इन स्कीम्स के प्रति ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है. इंट्रेस्ट रेट इस समय सालों के न्यूनतम स्तर पर है. यही वजह है कि निवेश के परंपरागत साधन जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी कम हुई है है. वर्तमान में स्मॉल सेविंग स्कीम्स में बेहतर रिटर्न मिल रहा है. कम्पाउंडिंग नेचर के कारण निवेशकों को ज्यादा फायदा मिल रहा है. इसके अलावा टैक्स के लिहाज से भी यहां ज्यादा लाभ मिलता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में सेविंग डिपॉजिट्स में 21.8 फीसदी के उछाल की संभावना है. पिछले वित्त वर्ष में इसमें 8.8 फीसदी का उछाल आया था. चालू वित्त वर्ष के मुकाबले वित्त वर्ष 2022-23 में इसमें 7.5 फीसदी तेजी का अनुमान है. उसी तरह नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में चालू वित्त वर्ष में 21.2 फीसदी की तेजी का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष इसमें 11.8 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी. अगले वित्त वर्ष में 7.5 फीसदी की तेजी का अनुमान है. PPF की बात करें तो चालू वित्त वर्ष में इसमें 7.6 फीसदी तेजी का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष 8.3 फीसदी रहा था. अगले वित्त वर्ष इसमें 7.5 फीसदी की तेजी का अनुमान है.

स्मॉल सेविंग्स ने ज्यादा आकर्षित किया है

इस संबंध में सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में स्मॉल सेविंग स्कीम्स ने निवेशकों को ज्यादा आकर्षित किया है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में फिर से फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रति निवेशक आकर्षित होंगे. अगले फिस्कल में इंट्रेस्ट रेट बढ़ने के कारण ट्रेंड रिवर्सल होगी. ऊपर के डेटा से इस बात की पुष्टि भी होती है.

6 लाख करोड़ आने की उम्मीद

डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी अजय सेठ ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार स्मॉल सेविंग स्कीम्स के जरिए 6 लाख करोड़ का फंड इकट्ठा करेगी. अमूमन यह राशि 3-4 लाख करोड़ रुपए के बीच होती है. वित्त वर्ष 2022-23 में यह राशि 4.25 लाख करोड़ रुपए के बीच होगी. सरकार ने पिछली सात तिमाही से इंट्रेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. अगर स्मॉल सेविंग के प्रति निवेशकों का क्रेज इसी तरह कायम रहेगा तो अगले साल सरकार मार्केट बॉरोइंग को कम कर देगी.

बाजार से 11.6 लाख करोड़ कर्ज उठाने का लक्ष्य

सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में बाजार से 11.6 लाख करोड़ का कर्ज उठाने का लक्ष्य रखा है. चालू वित्त वर्ष के मुकाबले यह 2 लाख करोड़ ज्यादा है. चालू वित्त वर्ष में सरकार का मार्केट बॉरोइंग का लक्ष्य 9.7 लाख करोड़ रुपए है. अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की ग्रॉस बॉरोइंग 14.95 लाख करोड़ रुपए है. चालू वित्त वर्ष के लिए बजट एस्टिमेट 12.05 लाख करोड़ रुपए है. वैसे इस बजट में सरकार ने ग्रॉस बॉरोइंग का लक्ष्य घटाकर 10.46 लाख करोड़ रुपए कर दिया है. रेवेन्यू में उछाल के कारण इस लक्ष्य को घटाया गया है.

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