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पिछले आठ सालों में विकास और विरासत दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं: पीएम मोदी

पुणे/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पिछले आठ सालों में विकास और विरासत दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हमारा दायित्व है कि हम अपनी प्राचीन पहचान और परम्पराओं को चैतन्य रखें।

प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को पुणे के देहू में जगतगुरु श्रीसंत तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह मंदिर न केवल भक्ति की शक्ति का एक केंद्र है बल्कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य को भी प्रशस्त करता है।

देश के विभिन्न भागों में होने वाली धार्मिक यात्राओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये यात्राएं एक भारत और एक राष्ट्र की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि आषाढ़ में शुरू होने वाली महाराष्ट्र की पंढरपुर यात्रा, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की यात्रा, मथुरा में ब्रज की परिक्रमा, काशी में पंचकोशी परिक्रमा, चारधाम और अमरनाथ यात्रा ये हमारे सामाजिक और आध्यात्मिक गतिशील के लिए ऊर्जा स्रोत की तरह हैं। हमारे संतों ने इन यात्राओं के जरिए एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को जीवंत रखा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनफ्रास्ट्रक्चर भारत के विकास का पर्याय बन रहे हैं तो हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास और विरासत दोनों एक साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आज महाराष्ट्र के पंढरपुर पालकी मार्ग के आधुनिकीकरण के साथ ही चारधाम यात्रा के लिए नये हाईवे बन रहे हैं। वहीं अयोध्या में भव्य राम मंदिर भी बन रहा है।

उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम परिसर भी अपने नये स्वरूप में उपस्थित है। सोमनाथ में भी विकास के बड़े काम किये गये हैं। पूरे देश में प्रसाद योजना के तहत तीर्थ स्थानों और पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। रामायण सर्किट का भी विकास किया जा रहा है। पिछले आठ वर्षों में बाबा साहेब अंबेडकर के पंचतीर्थों का भी विकास हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले उन्हें 2 राष्ट्रीय राजमार्गों को 4-लेन में बदलने के लिए पालकी मार्ग पर आधारशिला रखने का अवसर मिला। श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में और संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग का निर्माण 3 चरणों में किया जाएगा। इन सभी चरणों में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 350 किमी से अधिक लंबे राजमार्ग बनाए जाएंगे। इन सभी प्रयासों से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि हम दुनिया की प्राचीनतम जीवित सभ्यताओं में से एक हैं। इसका श्रेय भारत की संत परंपरा और ऋषियों मनीषियों को जाता है। उन्होंने कहा कि भारत शाश्वत है, क्योंकि भारत संतों की धरती है। हर युग में यहां देश और समाज को दिशा देने के लिए कोई न कोई महान आत्मा अवतरित होती रही है। आज देश संत कबीरदास की जयंती मना रहा है।

उन्होंने कहा कि संत तुकाराम जी की दया, करुणा और सेवा का वो बोध उनके ‘अभंगों’ के रूप आज भी हमारे पास है। इन अभंगों ने हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता, जो समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वही तो अभंग है। प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायक के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर को जब सजा हुई, तब जेल में वो हथकड़ियों को चिपली जैसा बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे। अलग-अलग कालखंड और अलग-अलग विभूतियां लेकिन सबके लिए संत तुकाराम की वाणी और ऊर्जा उतनी ही प्रेरणादायक रही है।

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