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“ढाक का तीन पात” साबित हुआ मुनीर का तीन दिवसीय ईरान दौरा, तेहरान ने दो टूक कहा-नहीं छोड़ेंगे परमाणु कार्यक्रम

इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का तीन दिवसीय तेहरान दौरान “ढाक का तीन पात” साबित हुआ है। अमेरिका की चमचागिरी कर रहे मुनीर की लाख कोशिशों के बावजूद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। ईरान से साफ कह दिया कि वह अपने एनरिच यूरेनियम को किसी को भी ट्रांसफर नहीं करेगा और न ही परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटेगा। इससे पहले मुनीर ने ट्रंप के पास यह झूठा संदेश भेजवाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया कि ईरान एनरिच यूरेनियम ट्रांसफर करने को तैयार हो चुका है।

ईरान के सभी टॉप लीडरों को मनाया, फिर भी कुछ हाथ न आया

मुनीर ने अपने 3 दिवसीय तेहरान दौरे के दौरान ईरान के सभी टॉप लीडरों को मनाने का प्रयास किया। ताकि वह अमेरिका के नापाक ईरादों के सामने किसी तरह ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से अपनी हार मान लेने और सरेंडर करने पर मजबूर कर दे। मगर ईरान ने अपनी पूर्व शर्तों से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही शनिवार को आसिम मुनीर का ईरान का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा समाप्त हो गया। यह यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को सुलझाने तथा क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों का हिस्सा थी। मुनीर बुधवार (15 अप्रैल) को तेहरान पहुंचे थे।

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते के बाद वे ईरान का दौरा करने वाले पहले विदेशी सैन्य नेता बने। यात्रा के दौरान उन्होंने उच्च स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बताया कि मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और खातम उल-अंबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही से भी अलग-अलग चर्चाएं कीं।प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल थे।

पूरा नहीं हुआ ट्रंप को खुश करने का मकसद

पाकिस्तान इस वार्ता को सफल बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा था। ताकि वह ट्रंप को खुश कर सके। मगर उसका सपना अधूरा रह गया। आईएसपीआर के बयान में कहा गया कि मुनीर की सभी मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना था। चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, वर्तमान राजनयिक प्रयासों और लंबित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया। यह बात अलग है कि मुनीर को तेहरान से खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

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