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उत्तर प्रदेश में कमीशनखोर डॉक्टरों की टोह ले रही सरकार, स्वास्थ्य विभाग ने दी है चेतावनी, बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

  • सरकारी अस्पतालों में ऐसे मामले पकड़े गए तो सीएमएस भी होंगे जिम्मेदार

लखनऊ: राज्य सरकार राज्य के कमीशनखोर सरकारी डॉक्टरों की टोह ले रही है। स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी दी है कि बाहर की दवा लिखने वाले चिन्हित डॉक्टरों पर होगी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं सरकारी अस्पतालों में ऐसे मामले पकड़े गए तो सीएमएस भी जिम्मेदार होंगे। दरअसल, अस्पतालों में दवाओं का टोटा बताकर कमीशन खाने की लालच में तमाम डॉक्टर शासन के मंशानुरुप सरकारी या जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। भुक्तभोगी इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक, सीएमओ या डीजी हेल्थ से कर सकता है।

सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बैठे डॉक्टर कई दफा मरीज को बाहर की दवाइयां लिख देते हैं, जो काफी महंगी होती हैं और आम जनमानस के बजट के बाहर भी होती हैं। जिला अस्पतालों में भी ज्यादातर ऐसे मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं, जो आर्थिक तौर पर कमजोर होते हैं। ऐसे व्यक्ति को अगर 15 दिन की दवाई ढाई से 3 हजार में खरीदनी पड़ जाए तो यह उस पर भारी पड़ जाता है। इसी हकीकत का फीडबेक लेते हुए शासन ने हिदायत दी है कि अब सरकारी जिला अस्पतालों में चिकित्सक बाहर की महंगी दवाई नहीं लिख सकेंगे। अगर कोई डॉक्टर पर्चे पर बाहर की दवाई लिखता है और इसकी शिकायत मिलती है तो उस पर एक्शन होगा।

सरकारी अस्पतालों में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन की ओर से भेजी जाने वाली करीब 200 से अधिक दवाएं उपलब्ध रहती हैं। इसी का संज्ञान लेते हुए शासन की तरफ से यह निर्देश जारी किया गया है कि किसी भी सरकारी अस्पताल में मरीज को महंगी दवाएं न लिखी जाएं। इसके अलावा अस्पताल के समय ओपीडी कक्ष से गायब रहने वाले डॉक्टर भी चिह्नित किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक भी जिम्मेदार होंगे। चेतावनी दी गई है कि 15 नवंबर के बाद शासन स्तर की टीमें अस्पतालों का निरीक्षण करेंगी।

शासन की ओर से यह निर्देश दिया गया है जिसे सभी जिला अस्पतालों को अवगत करा दिया गया है। इस स्थिति में कोई भी चिकित्सक बाहर की दवाई न लिखें।

डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, महानिदेशक स्वास्थ्य

सादी पर्ची पर दवा लिखी मिली तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ निलंबन तक की कार्रवाई होगी। जो दोषी डॉक्टर है, उस पर तो कार्रवाई होगी ही, साथ में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे।

– अमित कुमार घोष, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा-स्वास्थ्य)

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