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राजकोट में दरिंदगी करने वाले को सजा-ए-मौत : मात्र 45 दिन में आया कोर्ट का फैसला, 7 साल की मासूम को मिला न्याय

राजकोट। मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कड़ा प्रहार करते हुए राजकोट की एक विशेष अदालत ने शनिवार को मानवता को शर्मसार करने वाले अपराधी को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और अमानवीय क्रूरता करने वाले 30 वर्षीय राम सिंह तेर सिंह को फांसी की सजा का आदेश दिया।  यह मामला न केवल दुष्कर्म का था, बल्कि अपराधी की चरम क्रूरता का भी था।

आरोपी ने वारदात के दौरान मासूम बच्ची के प्राइवेट पार्ट में 5 इंच लंबी लोहे की रॉड डाल दी थी। इस भयावह हमले के बाद बच्ची की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने कई घंटों की मशक्कत और जटिल सर्जरी के बाद बच्ची की जान बचाने में सफलता पाई थी।

4 दिसंबर को मासूम के साथ की थी हैवानियत

घटना 4 दिसंबर 2025 की है, जब खेत में खेल रही बच्ची को आरोपी बहला-फुसलाकर झाड़ियों की ओर ले गया और उसके साथ हैवानियत की। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई। इस घटना ने पूरे गुजरात को झकझोर कर रख दिया था।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। 8 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया और केवल 11 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अहम सबूत बरामद हुए और डीएनए रिपोर्ट ने भी उसकी संलिप्तता की पुष्टि की। राजकोट ग्रामीण के एसपी विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि मेडिकल, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ बच्ची की पहचान परेड इस केस की सबसे मजबूत कड़ी बनी।

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