उत्तर प्रदेशवाराणसी

गौ आधारित प्राकृतिक खेती करें किसान: सीएम योगी

  • मुख्यमंत्री बीएचयू में आयोजित तीन दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम में शामिल हुए
  • प्रदेश में गंगा किनारे के 27 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढावा दिया जाएगा

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक नुकसान धरती और जल का ही हुआ है। धरती माता के साथ खिलवाड़ हर हाल में बंद होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है रासायनिक खेती की जगह गौ आधारित प्राकृतिक खेती की जाए। प्राकृतिक खेती से जो उत्पाद आता है, उसकी केमिकल वाली खेती के उत्पाद से तुलना की गई तो पता चला कि गो आधारित प्राकृतिक खेती ज्यादा बेहतर है। मुख्यमंत्री रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सुफलाम’ को सम्बोधित कर रहे थे। तीन दिवसीय संगोष्ठी में दूसरे दिन शामिल मुख्यमंत्री ने किसानों से गौ आधारित प्राकृतिक खेती करने का आह्वान कर कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार गंभीर है । किसानों को विभिन्न योजनाओं के जरिए लाभ दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गंगा किनारे के 27 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढावा दिया जाएगा। इसके लिए प्राकृतिक परिषद का गठन किया गया है। कृषि विभाग ने भी किसानों की स्थिति सुधारने के लिए व्यवस्था बनाई है। केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर इस दिशा में काम किया है। इसके सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री ने गंगा की स्वच्छता में नमामि गंगे परियोजना का उल्लेखकर कहा कि कानपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 में राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में शामिल हुए थे। तब कानपुर में सीसामऊ नाले में 14 करोड़ लीटर प्रतिदिन सीवेज गंगा में डाला जाता था। आज स्थिति पूरी तरह अलग है। आज यहां मछली और जलीय जीव दिखाई दे रहे हैं। यह सकारात्मक परिवर्तन है। ये दिखाता है कि मां गंगा का जल अब शुद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के पहले भी हम लोग काशी में आते थे। नमामि गंगे परियोजना के लागू होने के पहले हालात दूसरे थे। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के अफसरों ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के लागू होने के पहले और लागू होने के बाद में अंतर आया है। पहले जब वे लोग गंगा में अभ्यास करते थे तो पूरे शरीर में लाल चकत्ते पड़ जाते थे। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुंभ का उल्लेखकर कहा कि प्रयागराज कुंभ में 24 करोड़ श्रद्धालु आए थे और दुनिया के सामने सुरक्षा, सुव्यवस्था व स्वच्छता का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खुद के विकास के लिए लोग पर्यावरण को जहरीला बनाते जा रहे हैं। जीवन का अस्तित्व पांच तत्वों क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा से ही है। इसे अब बचाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर सराहना के बाद कहा कि अगले एक वर्ष तक भारत जी-20 देशों का नेतृत्व करके दुनिया को नया मार्गदर्शन देगा। यह भारत के लिए गर्व की बात है। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैया जी जोशी,प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी मौजूद रहे।

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