खाद्यान्न की कालाबाजारी की फर्म ‘मेसर्स वीना ट्रेडर्स’ को ‘श्रीकांत गोस्वामी’ ने थमाया 80 करोड़ का टेण्डर

लखनऊ। सरकार बनने के बाद ही भ्रष्टाचार का नाश करने और शासन से लेकर विभागों में एक ही जगह पर धौंसिया कर बैठे अफसरों की अकूत संपत्ति का ब्यौरा मांगा था लेकिन उस पर कितना अमल हुआ इसका सही जवाब तो आपको आपके चुनिंदा ब्यूरोक्रेटस ही दे सकते हैं। क्या आपको मालूम है कि उ.प्र.राज्य भंडारण निगम में महा भ्रष्टाचार की गाथा साढ़े चार वर्ष से लिखी जा रही है ।भ्रष्टाचार की कहानियां तो कई हैं । लेकिन उ. प्र. राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी, और उप-प्रबंधक सुभाष पाण्डेय ने मिलकर लगभग 80 करोड़ का टेण्डर एक ऐसे फर्म को दे दिया जिसे पूर्व के टेण्डर में खाद्यान्न की कालाबाजारी करने पर शासन ने वर्ष 2020-21 में डिबार (विरक्त) कर दिया था। सिक्योरिटी भी जब्त कर ली गयी थी। इतना ही नही, शासन के निर्देश पर फर्म के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया गया था और ऐसे फर्म को गुपचुप तरीके से,कोर्ट और शासन को गुमराह करते हुये श्रीकांत गोस्वामी ने टेण्डर दे दिया ?

जिस फर्म पर श्रीकांत गोस्वामी ने मेहरबानी दिखायी उसका नाम मेसर्स वीना ट्रेडर्स है। अब ये बताने की जरूरत नहीं समझता कि इस भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिये श्रीकांत गोस्वामी और उसकी टीम को किस तरह से लाभान्वित किया गया होगा। खैर, मुख्यमंत्री जी,सभी जानते हैं कि चुनाव करीब आते ही सरकार को गरीब,मजलूम याद आने लगते हैं लेकिन क्या सरकारी धन की लूट करने वाले अधिकारियों की जगह जेल की सलाखों में होनी चाहिये या फिर उन्हें लूट मचाने का पूरा अधिकार देना चाहिये ? मुख्यमंत्री जी,ये सवाल आप अपने मंत्री से क्यों नहीं पूछते कि आखिर भ्रष्ट श्रीकांत गोस्वामी और सुभाष पाण्डेय के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करते ?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात को आखिर उ.प्र. राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी गंभीरता से क्यों नहीं लेते ? आखिर जिस फर्म को अयोध्या के डीएम अनुज झा डिबार कर देते हैं,उस फर्म को श्रीकांत गोस्वामी ने बिना टेण्डर निकाले छह माह बाद दुबारा काम क्यों दे दिया ? आखिर गोस्वामी जी ऐसा कर,किसे चुनौती देना चाहते हैं,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को या शासन में बैठे प्रमुख सचिव बी. एन. मीणा को? इसे दुस्साहस ही कहेंगे कि मई 2020 में श्रीकांत गोस्वामी ने रामकोट,मिश्रिख,मलिहामऊ,पी.जी.ई. भदैचा एवं भंसरिया केन्द्र पर खाद्य निगम के स्टाक हैंडलिंग एवं परिवहन के काम के लिये लगभग 80 करोड़ का टेण्डर निकाला गया। टेण्डर में कम दर वाले फर्मों में कमी दिखाते हुये मेसर्स वीना टे्रडर्स को करोड़ों का टेण्डर स्वीकृत कर दिया। जबकि अयोध्या के डीएम अनुज झा ने राज्य भंडारण निगम में खाद्यान्न एवं परिवहन के खाद्यान्न की कालाबाजारी करने में मेसर्स वीना ट्रेडर्स को वर्ष 2020-21 के लिये डिबार कर सिक्योरिटी मनी जब्त करा लिया था। ऐसा होते ही श्रीकांत गोस्वामी और उनके चुनिंदा अधिकारियों के होश फाख्ता हो गये। इनलोगों की सलाह पर मेसर्स वीना ट्रेडर्स के मालिक अभिषेक जायसवाल कोर्ट चले गये। अधिकारियों ने जानबूझ कर इस मामले की पैरवी नहीं की। इस पर कोर्ट ने विभाग को प्रत्यावेदन निस्तारित करने का आदेश दिया लेकिन अधिकारियों ने खाद्य निगम के स्टाक हैंडलिंग एवं परिवहन के काम उसी काम को 4 मई 2021 को गुपचुप तरीके से दुबारा अभिषेक जायसवाल के मेसर्स वीना ट्रेडर्स फर्म को दे दिया।

 श्रीकांत गोस्वामी को अभिषेक जायसवाल की कंपनी मेसर्स वीना ट्रेडर्स को काम दिलाने के एवज में करोड़ों रुपये का लाभ मिला है। वहीं इस विभाग के जीएम,मुख्यालय संजीव कुमार राय को लाखों रुपये और उप-प्रबंधक,मुख्यालय सुभाष पाण्डेय को गिफ्ट के तौर पर चमचमाती गाड़ी गिफ्ट पहले ही मिल चुकी है। बहरहाल,श्रीकांत गोस्वामी ने जिस तरह से भ्रष्टाचार की नई कहानी लिखकर सहकारिता विभाग को बदनाम किया है,उससे साबित होता है कि उसका लक्ष्य है सरकारी योजनाओं के नाम पर डकैती डालना। सहकारिता विभाग के अफसरों में इस बात की हैरानी है कि आखिर भ्रष्टाचार की नई-नई कहानियां लिखने वाले श्रीकांत गोस्वामी के खिलाफ विभागीय मंत्री एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव खामोश क्यों हैं? बात जो भी ऐसा लग रहा है कि इनलोगों की नजरों में ना तो पीएम की कोई अहमियत हैं और ना ही सीएम की…।

सरकार बनने के बाद ही ठेकेदारी प्रथा में पूरी पारदर्शिता लाने के लिये ही मुख्यमंत्री ने ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया की शुरुआत की, लेकिन उ. प्र. राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। वे अपने चहेते फर्म मेसर्स वीना ट्रेडर्स को नियम विरुद्ध धकाधक ठेका देते चले जा रहे हैं। एफसीआई स्टॉक हैंडलिंग एवं परिवहन के काम के लिये ई-टेण्डरिंग के माध्यम से ठेकेदारों की नियुक्ति कर रहा है, लेकिन ये सब सिर्फ दिखावा है। बता दें कि रामकोट में खाद्य निगम के स्टाक हैंडलिंग एवं परिवहन निगम के काम के लिये 7.90 करोड़ का टेण्डर निकाला गया। रामकोट में 3.15 करोड़,मलिहामऊ में 3.25 करोड़ मिश्रिख,भंसरिया और पीईजी भदैचा के सभी केन्द्रों के लिये 1.50 करोड़ के टेण्डर। आखिर क्या वजह है कि अभिषेक जायसवाल की कंपनी मेसर्स वीना ट्रेडर्स को अधिकारियों ने करोड़ों का टेण्डर नियम विरुद्ध जाकर दे दिया ? वीना ट्रेडर्स वो फर्म है जिसे वर्ष 2020 में खाद्य एवं रसद विभाग,अयोध्या द्वारा एक अन्य मामले में दोषी पाये जाने पर ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था और ठेका निरस्त कर फर्म को सिक्योरिटी मनी भी वापस कर दी गयी ,उसे इनता बड़ा टेण्डर दे देना विभाग के मंत्री से लेकर शासन में बैठे अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल लगा रहा है ? अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ब्लैक लिस्टेड फर्म वीना ट्रेडर्स को उसी काम को छह माह बाद 4 मई 2021 को गुपचुप तरीके से सिर्फ एल-1 दिखाने पर लगभग 7.90 करोड़ का ठेका दे दिया गया, क्यों? अधिकांश केन्द्रों पर ठेेके की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी लंबे समय तक नये ठेकेदारों की नियुक्ति की जा रही है। भंडार गृहों पर पहले से नियुक्त किये गये ठेकेदारों से ही भंडारण निगम के निर्धारित एम.टी.एफ. में बिना कार्य विस्तार किये ही काम कराया जा रहा है। जिसकी वजह से विपत्रों की प्रतिपूर्ति भी मंडल कार्यालयों द्वारा की जा रही है। बताया जाता है कि उ. प्र. राज्य भंडारण निगम ने मई 2020 को अपने मंडल के अधीन रामकोट में ई-टेण्डर नोटिस नंबर 013- 562422820-04-14,मिश्रिख में ई-टेण्डर नोटिस नंबर 013-562422820-04-01,मलिहामऊ में ई-टेण्डर नोटिस संख्या 013-562422820-04-09,पी.ई.जी.भदैचा ई-टेण्डरिंग नोटिस नंबर 013-562422820-04-02 एवं भसरिया में ई-टेण्डरिंग नोटिस संख्या 013-562422820-04-03 केन्द्र पर नये ठेकेदारों की नियुक्ति के लिये के लिये ई- निविदा निकाली गयी और प्राप्त निविदाओं में सफल निविदाओं की प्राईस बीड खोली गयी। जिसमें मेसर्स वीना ट्रेडर्स का रेट एल-1 पायी गयी परन्तु ठेका आवंटित हो उससे पहले मेसर्स वीना ट्रेडर्स को आरएफसी, अयोध्या द्वारा पूर्व के एक ठेका में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने के मामले में संबंधित केन्द्र पर उनका ठेका निरस्त कर दिया गया। सिक्योरिटी मनी को जब्त करते हुये वर्ष 2020-21 में ठेके की प्रक्रिया में भाग ना लेने का सख्त निर्देश जारी कर दिया गया। साथ ही,अक्टूबर 2020 में भंडारण निगम द्वारा अपलोड, मलिहामऊ, भदैचा, मिश्रिख व भंसरिया केन्द्र के लिये अपलोड किये गये एम.टी.एफ. में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उक्त सभी केन्द्रों पर ई-टेण्डर से मिले सभी प्राइज बिडों को अस्वीकार करते हुये ई-निविदाओं को निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2020 में ही दुबारा उक्त केन्द्रों पर नये ठेकेदार की नियुक्ति के लिये ई-टेण्डर क्रमश: रामकोट में टेण्डर नोटिस संख्या 013-2945261020-05-37,मिश्रिख में टेण्डर नोटिस संख्या 013-2945261020-03-36,मलिहामऊ में टेण्डर नोटिस संख्या013-2945261020-05-35,पी.ई.जी.भदैचा में टेण्डर नोटिस संख्या 013-2945261020-05-33 एवं भंसरिया में टेण्डर नोटिस संख्या013-2945261020-05-34 प्रकाशित करायी गयी जिसकी टेक्रिकल बीड का परिणाम दिसंबर 2020 में ई-पोर्टल पर लोड कर दिया गया।

क्षेत्रीय प्रबंधक,लखनऊ द्वारा छह माह बाद उक्त नई ई-निविदाओं को पुन: निरस्त कर माह मई 2020 में आमंत्रित ई-निविदा,जिसमें मेसर्स वीना ट्रेडर्स द्वारा दी गयी रेट एल-1 पायी गयी, जिनकी प्राईस बीड को ऑनलाइन खारिज कर दिया गया था,उसे ठेका आवंटन का आदेश जारी कर दिया। क्षेत्रीय प्रबंधक  द्वारा अपने ठेका आवंटन आदेश में निगम के मुख्यालय पत्र संख्या रा.भा.नि.-942-वाणिज्य-है.ट्रा.-2021-22 में 4 मई 2021 द्वारा उपरोक्त केन्द्रों पर मेसर्स वीना ट्रेडर्स द्वारा दी गयी दरों की स्वीकृत निगम के सक्षम अधिकारी द्वारा प्रदान किया जाना दिखाया गया है। जबकि निगम मुख्यालय के उक्त आदेश पत्र में सिर्फ मेसर्स वीना ट्रेडर्स से प्राप्त दरें एल-1 पाये जाने का ही उल्लेख किया गया है। निगम मुख्यालय द्वारा किसी केन्द्र की कार्य दरों की स्वीकृति प्रदान नहीं की गयी है। खास बात तो यह है कि मेसर्स वीना ट्रेडर्स पर भंडारण निगम के कई अधिकारियों की खास कृपा है। बताया तो यह भी जाता है कि वीना टे्रडर्स में मुख्यालय पर तैनात उप-प्रबंधक सुभाष पाण्डेय की साझीदारी भी है। सुभाष पाण्डेय के सहयोग से ही ऑनलाइन ई-टेण्डर रिजेक्ट करने के बाद भी नये टेण्डर की प्राईस बीड को छह माह तक लंबित रखा गया। इसी प्रकार जिस मेसर्स वीना ट्रेडर्स को आरएफसी ने ठेका प्रक्रिया से अलग करने का आदेश दिया था,क्षेत्रीय प्रबंधक,लखनऊ ने लखनऊ मंडल के कई केन्द्रों पर जहां ठेका की अवधि खत्म हो गयी थी,वहां पर लगभग 10 माह तक बिना काम कराया। शर्मनाक बात यह है कि मुख्यालय से इस फर्म को कार्य विस्तार का आदेश लिये बिना ही धड़ल्ले से क्षेत्रीय प्रबंधक अवैध तरीके से काम कराकर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगायी और खुद लखपति बन गये। इतना ही नहीं, ऑनलाइन प्राईस बीड रद्द किये जाने के बाद भी निगम मुख्यालय के आदेश को गलत ढंग से प्रस्तुत कर अपने स्तर से फर्जी आदेश बनाकर मेसर्स वीना ट्रेडर्स को ठेका दिया गया। बताया जाता है कि एफसीआई के मंडल कार्यालय में तैनात कुछ अधिकारियों से सांठगांठ कर मेसर्स वीना ट्रेडर्स करोड़ों रुपये का फर्जी तरीके से काम कराकर सरकार को चपत लगाने का काम कर रही है,जो एक तरह से वित्तीय अनियमितता है।

इस फर्म पर अधिकारी कितने मेहरबान हैं इसका एक नमूना और दिखाता हूं।  मेसर्स वीना ट्रेडर्स को लाभान्वित करने के लिये 12 जनवरी 2021 को अपने अधिकार क्षेत्र में पडऩे वाले पी.ई.जी.नेरीकला टेण्डर नोटिस संख्या 013-40538121-06-38,पीईजी अंदेशनगर फेज 1 टेण्डर नोटिस संख्या 013-40538121–06-39 एवं पीईजी अंदेशनगर फेज 2 टेण्डर नोटिस संख्या 013-40538121-06-40 को प्रकाशित कराया। जिनकी टेक्रिकल बिड का निरीक्षण किये जाने के बाद लगभग पांच माह के बाद प्राइज बिड न खोलते हुये टेण्डर को रोके रखा। जबकि इन केन्द्रों पर फरवरी में ठेका की अवधि खत्म हो चुकी थी। पी.ई.जी.नेरीकला,पी.ई.जी.अदेशनगर फेज 1 पर ठेका खत्म होने के बाद भी पुनङ वीना ट्रेडर्स से बिना निगम मुख्यालय से कार्य विस्तार की स्वीकृति लिये बिना ही काम कराया जा रहा है। बता दें कि उक्त केन्द्रों पर ई-टेण्डर प्रकाशन की तिथि मेसर्स वीना ट्रेडर्स को आरएफसी द्वारा वर्ष 2020-21 में ठेका प्रक्रिया में भाग लेने से मना कर दिया था,उसके बाद इसे कैसे काम दिया गया? जब हाई कोर्ट ने भी मेसर्स वीना टे्रडर्स को ठेके में भाग लेने से मना कर दिया है तो फिर उसे क्यों और किस आधार पर काम दिला दिया?

उ.प्र.राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी,जिन्हें उक्त ठेका को दिलाने के एवज में करोड़ों रुपये सौगात के रुप में मिला,ऐसा उनके विभाग के अंदरखाने की खबर रखने वाले उन्हीं के भरोसेमंद अधिकारियों ने बताया। इसी तरह उप-प्रबंधक,मुख्यालय सुभाष पाण्डेय को चमचमाती गाड़ी,लाखों रुपये भी मेसर्स वीना ट्रेडर्स ने लखपति बना दिया। जब सबने अपने हिस्से का माल ले लिया और अचानक वीना ट्रेडर्स ब्लैकलिस्टेड करार दिये गये। इसका मतलब,अधिकारियों ने जो माल लिया,उसे वापस करें…। अब माल भरा कोई कैसे वापस करता…। देने में बहुत दर्द जो होता। इसलिये श्रीकांत गोस्वामी और उनकी जांबाज टीम ने वीना ट्रेडर्स के मालिक अभिषेक जायसवाल को ज्ञान दिया कि कोर्ट में चले जाओ। श्री जायसवाल कोर्ट गये और भेडारण निगम की तरफ से पैरवी बंद कर दी गयी,जिसकी वजह से कोर्ट ने फैसला दिया कि प्रत्यावेदन को निस्तारित किया जाये। ध्यान दिया जाये कोर्ट ने अधिकारियों को सिर्फ प्रत्यावेदन का निर्देश दिया था ना कि बहाल का…। इसी को आधार बनाकर श्रीकांत गोस्वामी की टीम ने मेसर्स वीना ट्रेडर्स को उसी काम का टेण्डर गुपचुप तरीके से थमा दिया।

सांभर : संजय पुरबिया, the sunday views 

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