मा. उच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत सहकारिता विभाग के 2343 कर्मचारियों की हो सकती है घर वापसी !

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान सहकारिता विभाग में वर्ष 2012 से 2017 के मध्य अलग-अलग 2324 पदों पर हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली की जाँच व नतीजों पर बुलडोज़र न चलने का कारण केवल सरकारी तंत्र का जुगाड़ मन्त्र है, सहकारिता मंत्री और अपर मुख्य सचिव की उदारवादी नीतीयों के चलते अनेक कुपात्र सहकारी विभागों के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत है, फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र पर मंत्री के राशन पानी का हाल ख्याल रखने वाले सुभाष चन्द्र पाण्डे को विभागीय उदारवादी नीतियों के चलते क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर बैठा कर करोड़ों रुपये का भण्डारण घोटाले की जानकारी मिलने के उपरांत भी प्रबंध निदेशक द्वारा फर्जी शैक्षिक शेक्षिक प्रमाण पत्र की जांच को विगत 4 वर्षों से दबा दिया गया है।

माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिका संख्या 12748/2022 मे सुनवाई करते हुये मा. न्यायाधीश डा. कौशल जायेंद्र एवं नलिन कुमार श्रीवास्तव द्वारा पारित आदेश दिनांक 09.09.2022 में एसआइटी प्रमुख को भर्तियों में गड़बड़ी के मामले में दर्ज किए गए मुकदमे की जांच रिर्पोट के साथ न्यायालय के सम्मुख दिनांक 29.09.2022 को पेश होने का आदेश पारित किया गया है।

विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने पुख्ता साक्ष्य जुटाने के बाद विभिन्न पदों पर हुई भर्तियों में गड़बड़ी के मामले में अलग-अलग छह मुकदमे दर्ज किए गए थे लेकिन जांच के नाम पर फाइलें अटकी हैं, जबकि ऐसे मामलों में दोषी कर्मचारी-अधिकारी को सीधे बर्खास्त करने का प्रावधान है। उन्हें दोबारा सरकारी नौकरी देने, लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ने के लिए भी अपात्र माना गया है। उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर भी करने का निर्देश है लेकिन अब तक कोई भी जालसाज सीखचों के पीछे नहीं भेजा गया है। जांच में सहकारिता की इन संस्थाओं की भर्तियों में नियमों की अनदेखी कर शैक्षिक अहर्ताएं और ओएमआर सीट से छेड़छाड़ किए जाने के सबूत मिले हैं और वर्ष 2021 में जांच करीब करीब पूरी हो गयी थी जिसमें उ.प्र.भंडारागार निगम, पीसीएफ, लैकफेड और उ.प्र.सहकारी ग्राम विकास बैंक में करीब 2300 पदों पर हुईं भर्तियों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और मनमानी की बात भी प्रमणित थी परन्तु उदारवादी नीतियों के चलते जाँच के परिणाम को विलम्ब किया जाता रहा है जबकि माननीय सर्वाेच्च न्यायलय द्वारा अपने आदेश में स्पष्ट कहा है की अवैध प्रमाण पत्र के आधार पर मिली नौकरी हर हाल में छीन ली जाएगी और आरोपी को नियोक्ता सीधे बर्खास्त भी कर सकता है।

डॉक्टर दीपक कोहली, संयुक्त सचिव, सहकारिता अनुभाग 2, द्वारा आइजीआरएस संदर्भ संख्या 60000220060324 के संदर्भ में विशेष सचिव मुख्यमंत्री, आईजीआरएस अनुभाग 1,़ उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया गया है कि सहकारिता विभाग के अधीनस्थ संस्थाओं में वर्ष 2012 से वर्ष 2017 के मध्य उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के माध्यम से की गई भर्तियों में हुई अनियमितता की जांच एसआईटी द्वारा पूर्ण कर जांच आख्या प्रेषित की जा चुकी है, विशेष अनुसंधान दल द्वारा दोषी पाए गए अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज कराई जा चुकी है। प्रकरण में प्राप्त जांच आख्या के आधार पर सम्बन्धित प्रकरण में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है तथा पाए गये दोषी अधिकारियों/कार्मिकों के विरुद्ध गृह विभाग की अपेक्षानुसार कार्यवाही वर्तमान में प्रचलित है।

मा. उच्च न्यायालय के आदेश से ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग में मनमानी और उदारवादी नीतीयों के दिन अब ज्यादा दिन नही चलेंगे और सपा शासनकाल में वर्ष 2012 से 2017 के बीच हुयी सहकारिता विभाग में 2343 पदों पर जो भर्तीयां हुयी थी उपनर बुलडोजर चलने के साथ साथ फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र पर कार्यरत कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जायेगा।-डॉ. मो. कामरान

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