उत्तर प्रदेशबड़ी खबरवाराणसी

ज्ञानवापी प्रकरण : सिविल जज ने जिला जज को सौंपी केस की फाइल

  • वाराणसी जिला अदालत पर टिकीं लोगों की निगाहें, सोमवार को होगी सुनवाई

वाराणसी। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण में वाराणसी जिला अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट सहित तीन प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई होगी। इससे पहले शनिवार को सिविल कोर्ट (सीनियर डिविजन) की ओर से केस की फाइल जिला अदालत को सौंपी गयी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए केस को वाराणसी जिला अदालत को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि जिला जज 08 हफ्ते में सुनवाई को पूरा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शनिवार को इस केस से जुड़ी सभी पत्रावलियों को सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने जिला जज डॉ.अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत को सौंप दिया। मुकदमा संख्या 693/21 की सुनवाई अब सोमवार (23 मई) से जिला अदालत में शुरू होगी। ऐसे में अब जिला अदालत में होने वाली सुनवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की वर्षों पुरानी तस्वीरें वायरल कर लोग दावा कर रहे हैं कि मस्जिद परिसर में जगह-जगह स्वास्तिक, त्रिशूल और कमल जैसी कलाकृतियां मिली हैं। ये सब कलाकृतियां प्राचीन भारतीय मंदिर शैली के रूप में प्रतीत होती हैं, जो काफी पुरानी हैं।

इसे देखकर कोई भी कह सकता है कि विवादित स्थल मस्जिद नहीं, मंदिर है। हटाये गये एडवोकेट कमिश्नर और स्पेशल एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट भी बहस के केंद्र में है। वजूखाने में शिवलिंग मिला या फव्वारा इसको लेकर भी तर्क दिए जा रहे हैं।

सांसद ओवैसी को दी खुली बहस की चुनौती

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में एआईएमआईएम के प्रमुख एवं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की विवादास्पद बयानबाजी से वादी पक्ष के पैरोकार नाराज हैं। शनिवार को वादी पक्ष के पैरोकार विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन ने ओवैसी को चुनौती दी। बिसेन ने कहा कि ओवैसी इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही में शामिल होकर सबूत दें।

ऐसा नहीं करने पर बिसेन ने कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है। बिसेन ने ओवैसी को पत्र लिखकर कहा कि लगभग 15 दिनों से ज्ञानवापी मामले को लेकर बयान दे रहे हैं। आप एक सांसद होने के साथ-साथ बैरिस्टर भी हैं। सांसद के तौर पर कोई भाषण देते हैं तो उसमें तथ्यों की भरमार होती है, लेकिन ज्ञानवापी मामले में दिए गए बयान में कोई तथ्य नहीं दिखा। अदालत में एक बैरिस्टर और शोधकर्ता की हैसियत से आएं और कानूनी लड़ाई लड़ें।

Aina Today

Aina Today न्यूज पोर्टल है, जो देश-दुनिया, उत्तर प्रदेश और स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को तथ्य, निष्पक्षता और जनसरोकार के साथ पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button