भाई पैसा हो तो क्या नहीं हो सकता !

मियांजी के पैसे ने लूलू मॉल बनाया और दिमाग से लूलू को 24 घंटे में देश दुनिया में मुफ्त में भुनाया,
नमाज़ हो गयी, हनुमान चालीसा का पाठ करके उत्साही भाइयों ने मियां जी के लूलू मॉल को clean, green, और मज़हबी भाईचारे की बड़ी निशानी के रूप में देश और दुनिया मे प्रचारित कर दिया।

मियां के लूलू मॉल में चंद सेकंड की नमाज़ का वीडियो वायरल होते ही सूतिया टाइप के लोगों ने नफ़रत का ऐसा माहौल बनाया जिसने विदेशी प्रतिद्वंद्वियों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने का खौफ़ जगाया जिसके चलते आने वाले कुछ सालों में सिर्फ लूलू ही लूलू दिखेगा और लूलू का वर्चस्व नज़र आएगा।

उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट का जो दस्तरखान शासन प्रशासन ने सजाया था इस लूलू के मज़हबी फसाद ने विदेशी निवेशकों को खूब डराया है, नमाज़ और पाठ का कार्यक्रम तो लूलू के आंगन में हो गया वही प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय विवादों से बचाने और अपनी साख़ बनाये रखने हेतु 21 लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है ताकि धर्म के नाम पर कानून का उल्लंघन करने वाले गमछाधारी नौजवानों को थोड़ा काबू किया जा सके और विदेशी निवेशकों को उत्तर प्रदेश की ज़मीन पर सब्ज़ बाग की जो तस्वीर दिखाई गयी है, वो बनी रहे।

योगी सरकार के इस कदम से मियां का साथ और दोस्ती का रंग भी परवान चढ़ गया है क्योंकि सियासत की गाड़ी और सड़क पर दौड़ती गाड़ी, दोनों के ईंधन के लिए मियां का हाथ ज़रूरी है , कहीं मियां के नाम पर काम बनाना है तो कहीं मियां के ईंधन से गाड़ी को दौड़ाना है, मियां है तो बेरोज़गारी, कालाबाज़ारी, महँगाई पर कोई बात नही होती सिर्फ मज़हबी फ़साद में आम इंसान खबरिया चैनल की डिबेट में झूलता रहता है, एक दिन अच्छे दिन आएंगे इसी ख़्याल में मियां को कहीं गरियाते, कभी जनसंख्या की बात दोहराते और कहीं गले लगाते, डॉलर के अच्छे और बढ़ते दिन देख कर आम इंसान खुश होता है। आवाम को।लगता है डॉलर के अच्छे दिन आ गए है, बस शतक लग जाये और डॉलर 100 रुपये के बराबर हो जाए तो सभी वादे पूरे हों जाएंगे, महँगा इलाज, बढ़ती महँगाई और घटता रोजगार सब ठीक।हो जाएगा, एक बार विदेशी निवेशक उत्तर प्रदेश की ज़मीन पर आ जाये तो सब ठीक हो जाएगा, डॉलर की गंगा बहेगी, नदियों में स्वच्छ और निर्मल जल मिलेगा, गंदगी ग़ायब हो जाएगी लेकिन ख्याली पुलाव का कोई हल नही होता और विदेशी निवेशकों को फ़सादी पुलाव का रंग दिख गया है।

फ़िलहाल विदेशी मियांजी के लूलू मॉल ने ऐसी आग लगा दी है कि सुतिया टाइप के लोग जिस जगह को नक्खास बताते घूम रहे हैं उस जगह सूफियाना अंदाज के, हर धर्म जाति के लोग घूमते हुए दिखे, ना उनका कोई धर्म था, न कोई मज़हबी दीवार लेकिन इस लूलू विवाद में कई लोग सोशल मीडिया पर लुल ज़रूर बन गए है।बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी मियां शब्द पर बकलोली करने लगे, अपने अपने शातिराना अंदाज़ में मियां शब्द को परिभाषित करते नजर आये।

ये बकलोली, ज्ञान की बोली छोड़िए और लूलू मॉल परवार के साथ घूमने जाइये। मियां यूसफ़ अली के लूलू मॉल के अंदर लोगों का हुजूम ऐसे घूम रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा खजाना हाथ लग गया हो, गेम जोन में कदम रखने की जगह नही थी वहीं सुपर बाजार की कड़ी में लखनऊ शहर को लूलू हाइपर मार्केट के नाम से एक अनमोल श्रृंखला मिली है जो न सिर्फ देखने वाली है बल्कि खरीदारी करने वाली एक नायाब जगह है,,

मांसाहारी खाने वाले हर धर्म, मज़हब के लोगों के लिए एक ही छत के नीचे जिस खूबसूरती से देसी मुर्गा, बटेर, मछली और मटन के लाजवाब सामान सजे है वो काबिले तारीफ़ है। नक्खास मार्केट रेट से कम दामों पर, गुणवत्ता को बनाए रखते हुए जब अवधि मसालों से मटन रोगन जोश तैयार होगा तो इस रोगन जोश में वह सारे फसाद खत्म हो जाएंगे जो लुलु मॉल के खुलने पर दिखाई दे रहे हैं। बेकरी, फल, साग, भाजी का एक साथ इतना बड़ा संग्रह फिलहाल लखनऊ में।पहले कहीं नही देखने को मिला है, वाजिब कीमत पर उत्तम क्वालिटी का सामान एक आम इंसान को मिल रहा है तो ऐसे लूलू मॉल को नक्खास बाजार बताकर सुतिया टाइप के लोग अपना कौन सा उल्लू सीधा करना चाहते हैं ये मियां जी जितनी जल्दी समझ ले उतना फायदे में रहेंगे।

प्रचार प्रसार के नाम पर ज़्यादा पैसा खर्च करने में कभी कभी नुकसान होता है, ये उत्तर प्रदेश है यहां खामोशी में ही समझदारी है मियांजी, ये लूलू मॉल देश का पहला मॉल है जो अपने मालिक के नाम से जाना जाता है वरना किस मॉल का कौन मालिक कोई नही जानता, ये मियां जी समझ लीजिए ।
ज़्यादा प्रचार न करिए ,, लूलू मॉल बनाया बहुत नीक है, हमने आईना दिखाया ठीक है।
डॉ मोहम्मद कामरान

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