आईना द्वारा आयोजित पत्रकार संगोष्ठी में सप्त ऋषियों ने पत्रकारों को दी नई दिशा

लखनऊ, पत्रकारिता इस समय कठिन दौर से गुजर रही है यह उद्गार वरिष्ठ पत्रकारों ने आईना द्वारा आयोजित पत्रकार संगोष्ठी में कहीं। गोमती नगर स्थित एफिल क्लब में ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एसोसिएशन द्वारा आयोजित “” समाज को आईना दिखाने वाले पत्रकार अब कहां “” विषयक संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश के नामचीन पत्रकारिता के पुरोधाओं और वरिष्ठ पत्रकारों के तीन पीढ़ियों का संगम देखने को मिला। इस संगोष्ठी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि, आजादी के बाद से लेकर वर्तमान की पत्रकारिता का ज्ञान अर्जन करने का अवसर प्राप्त हुआ। संगोष्ठी में पूर्व की पत्रकारिता और वर्तमान में की जा रही पत्रकारिता के अंतर पर प्रकाश डाला गया ।

संगोष्ठी में यू एन आई और पीटीआई जैसी संस्थाओं के पत्रकारिता के पुरोधाओं ने सहभागिता कर संगोष्ठी में आए पत्रकारों के बीच अपने अपने संस्मरणों का साझा किया। पत्रकारिता के पुरोधा वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार जयसवाल , पूर्व सूचना आयुक्त वरिष्ठ पत्रकार विरेंद्र सक्सैना, यू एन आई के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दुबे , पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी, के न्यूज़ चैनल के वरिष्ठ पत्रकार के बख्श सिंह, संघ प्रमुख प्रचारक और वरिष्ठ पत्रकार भास्कर दुबे, सरल व्यक्तित्व और मृदुभाषी वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्रा सहित सभी ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा पहले पत्रकारिता हमसे होती थी अब पत्रकारिता का व्यवसायीकरण हो गया है। पत्रकारिता इस समय बहुत ही कठिन दौर से गुजर रही है।

जबकि पत्रकारिता के मूल उद्देश्य शब्दों की जादूगरी और अल्फाजों की बाजीगरी पर निर्भर करता है। अगर पत्रकार हैं तो आपको निर्भीक और निडर होना चाहिए। अपनी बात और समाचार को बेबाकी से लिखना चाहिए। पहले के दौर और आज के दौर में बहुत अंतर आया है। आज हर पत्रकार अपने नाम के आगे वरिष्ठ लिखने लगा है जबकि वरिष्ठता क्रम की अपनी एक सीमा होती है।
वरिष्ठ पत्रकार अजय जी ने अपने संबोधन में कहा,, आज दोषी है, वह जो निर्दोष है।

पथ प्रदर्शक हैं कि, जो बेहोश है।।
शोर जितना है यहां पर, सत्य तो हरदम रहा खामोश है।।

उन्होंने अपने संस्मरण में सन 1966 से लेकर आज तक की गई पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए, बाजार भाव संवाददाता के रूप में समाचार पत्र में आए और बाद में क्राइम रिपोर्टर बने। उन्होंने पत्रकारों से कहा की एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाना चाहिए। ताकि पत्रकारों को पत्रकारिता के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। पहले के लोग संत महात्माओं के आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे, समय परिवर्तित हुआ लोग गुरुकुल में जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे। उसी प्रकार आज पत्रकारों को भी प्रशिक्षण की सख्त आवश्यकता है ताकि उन्हें पत्रकारिता की कलाओं से अवगत कराते हुए प्रशिक्षित किया जा सके।

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दुबे ने भी अपने संस्मरण को साझा किया उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के आने से हम सभी गूगल बाबा से प्रशिक्षित होना चाहते हैं, लेकिन पत्रकारिता के पुरोधा बाबा से प्रशिक्षण नहीं लेना चाहते , क्यों की पत्रकारिता के बाबा प्रशिक्षण के बाद प्रैक्टिकल लिए बिना पत्रकारिता का प्रमाण नहीं दे सकते। इसलिए भी पत्रकारिता का स्तर पहले से कमजोर हुआ है।

भास्कर दुबे ने महामहिम रोमेश भंडारी जब उत्तर प्रदेश के गवर्नर थे उस समय की चर्चा परिचर्चा कर अपने संस्मरण को साझा किया । मनोज मिश्रा ने पत्रकारिता के व्यवसायीकरण और वर्तमान की पत्रकारिता पर समीक्षा करते हुए उसके बदलते परिवेश और अंतर से संगोष्ठी में आए पत्रकारों को अवगत कराया। उन्होंने कहा आजादी के बाद के पत्रकार और आज के युग की पत्रकारिता करने वाले पत्रकार की मौजूदगी एक विशेष मायने रखती है । हमें तीन पीढ़ियों का ज्ञानार्जन करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा आईना द्वारा प्रदेश अध्यक्ष के जन्मदिन को सकारात्मक रूप देते हुए संगोष्ठी का आयोजन कर पत्रकारों के हितों के संरक्षण में नई दिशा मिलेगी।

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