यूपी की पत्रकारिता में जय वीरू की जोड़ी बनकर उभरे अमरेन्द्र प्रताप सिंह और डॉ. मोहम्मद कामरान

लखनऊ (Syed Akhtar Ali)। यूपी की पत्रकारिता सन्निपात के दौर से गुज़र रही है। अव्यवस्था के खिलाफ लिखने और बोलने की हिम्मत बड़े से बड़ा पत्रकार जुटा नहीं पा रहा है। 4-6 पत्रकारों के समूह में बैठकर बड़ी-बड़ी बातें बोलने वाले बड़बोले पत्रकारों के मुंह पर दही जम गया है। दहशत का आलम यह है कि पत्रकारों के विरुद्ध आईटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखे जाने की धमकी के बाद अधिकतर पत्रकारों ने पहले की लिखी पोस्ट हटा दी है। ऐसे में अंधेरे में प्रकाश की किरण बनकर अमरेंद्र प्रताप सिंह और डॉ. मोहम्मद कामरान सामने आए हैं। यूपी के पत्रकारों ने इन्हें जय वीरू की जोड़ी का नाम दिया है।

आमतौर पर अमरेन्द्र प्रताप सिंह की छवि सरकार के करीबी पत्रकार की है। इनके कई विधायकों, मंत्रियों, सांसदों से बेहद करीबी संबंध हैं। वहीं डॉ. मोहम्मद कामरान उच्च शिक्षित पीएचडी और एलएलबी डिग्री धारक हैं। कामरान लगातार अव्यवस्था के खिलाफ मुखर रहते हैं। उल्लेखनीय है विधानसभा के सत्र में मीडिया कवरेज हेतु सभी राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पास जारी होते थे। इस बार बदली व्यवस्था के तहत चुनिंदा पत्रकारों को मीडिया कवरेज के लिए पास जारी हुए हैं। जिन राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मीडिया कवरेज हेतु पास निर्गत नहीं हुए उनकी नाराज़गी इस बात को लेकर है कि जारी किए गए पास मीडिया पासों में तमाम मानकों को ताक पर रखकर जारी हुए हैं। नाराज़ पत्रकारों के पास मानक विपरीत जारी पासों की बाकायदा लिस्ट है।

इस मसले पर सबसे पहले अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कलम चलाई। वही डॉक्टर मोहम्मद कामरान राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार होने के साथ-साथ एलएलबी डिग्री धारक भी है। दिलचस्प बात यह है कि छोटे-मोटे मुद्दों पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखने वाले कई पत्रकार इस मुद्दे पर आश्चर्यजनक रूप से मौन है, एक शब्द लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। हिम्मत पस्त पत्रकारों को जय वीरु की जोड़ी ने सामने आकर संजीवनी देने का काम किया है। इनकी बहादुरी की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। यूपी पत्रकारिता के ब्रह्मांड पर धूमकेतु की भांति चमकने वाले डॉक्टर मोहम्मद कामरान और अमरेंद्र प्रताप सिंह की जोड़ी से यूपी के पत्रकारों की उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं। वहीं राज्य मुख्यालय प्राप्त पत्रकार राजीव तिवारी ने अपना एडवोकेट का विज़िटिंग कार्ड पोस्ट करते हुए मानसून ऑफर की पेशकश दी है। उन्होंने कहा पत्रकारों को मुकदमों की फीस में 50% छूट और जिन पत्रकारों पर खबर लिखने पर प्रताड़ित करने के उद्देश्य से मुकदमा लिखवाया गया होगा उनके मुकदमे फ्री में लड़ुंगा। पत्रकाटों में सबसे ज़्यादा नाराज़गी समिति की निष्क्रियता को लेकर है।

One Comment

  1. कामरान भैया ने पत्रकारिता के आदर्शों की रक्षा की है,वर्ना कुछ लोग सत्ता प्रेम के सामने अपना पत्रकारिता धर्म भी भूल गए है,सरकार पत्रकारों को अपना प्रवक्ता बनाना चाहती है और पत्रकार भी सत्ता पक्ष के नेताओं,बड़े अधिकारियों के साथ अपने मधुर संबंध बनाना चाहते है,पत्रकार की सत्ता पक्ष और अधिकारियों के साथ दोस्ती स्वस्थ लोकतंत्र और पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है.

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